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Natural A1 Natura Right Health Care. Ayurvedic, Homeopathy, Gharelu Upchar.

  • 12/4/2019 22:03

जाने-अनजाने में जहर खाने पर:- गर्म पानी में थोड़ा - सा नमक डालकर व्यक्ति को पिलाएं । इससे उलटी होने लगती है। दूध में घी डालकर कई बार पिलाने से विष का प्रभाव कम हो जाता है।

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  • 12/4/2019 17:43

यदि हाथ-पैर में कांटा या कांच चुभ जाएं तो उस जगह पर जरा सा फेवीकोल टपका दें। सूखने के बाद उसे हटा लें, कांटा या कांच उसके साथ ही बाहर निकल आएगा।

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  • 12/4/2019 09:15

बैच फ्लावर की 12 अचूक दवाईयाँ :- ड़ा बैज ने शुरू में 12 किस्म के मानसिक लक्षणों की खोज की जिनका प्रभाव मनुष्य की मानसिक अवस्था पर पड़ता था। मानसिक अवल्था पर प्रभाव डालने वाले इन लक्षणों के लिए 12 विशेष फूलों के अर्क ढूंढ़े जिन से मन की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। इन दवाईयों को " 12 अचूक दवाईयाँ " या " 12 Healer Medicines " कहा गया।

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  • 11/4/2019 09:36

अंगूरों और मुनक्का की चिकित्सा और प्रयोग से मनुष्यों और रोगियों की मानसिक और शारीरिक शक्ति, वजन, तथा रक्त बढ़ जाता है। दृष्टि तेज हो जाती है। बाल लम्बे और चमकदार हो जाते हैं। शरीर पर विशेष प्रकार की चमक (तेज) आ जाती है। चेहरा सुन्दर हो जाता,पुराने रोग दूर हो जाते हैं। मनुष्य नई शक्ति और जवानी प्रतीत करने लग जाता है।

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  • 8/4/2019 17:51

शरीर से सांप के जहर को कान के माध्यम से निकालने की आश्चर्यजनक चिकित्सा।

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  • 8/4/2019 15:55

घमौरियो का घरेलू उपचार :- सीर पर मुलतानी पिट्टी का लेप करने से घमौरियां जाती रहती हैं।

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  • 8/4/2019 08:46

मुंह में छालें लक्षण:- बच्चों को गर्म मसालों के पदार्थ खिलाने, तली हुई चीजें देने आदि के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं। गर्म पदार्थ बच्चों के मुख की कोमल श्लेष्मिक झिल्ली में प्रदाह पैदा कर देते हैं, जिससे मुंह में छाले निकल आते हैं। इस रोग में जीभ, तालु, होंठों के भीतरी भाग में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं। ये सफेद तथा लाल रंग की होती हैं। इनमें जलन होती है। सुई चुभने की तरह दर्द होता है।

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  • 8/4/2019 00:14

नाभी का पकना:- कारण तथा लक्षण, शिशुओं (बच्चों) के नाल काटने में यदि गड़बड़ हो जाती है या गलत दला लग जाती है अथवा नाल काटने का यंत्र संक्रमित होता है, तो नाभि पक जाती है। इससे बच्चों को काफी पीड़ा होती है। दूध पीने में अरूचि हो जाती है, उलटी आती है तथा कभी-कभी बुखार भी आ जाता है।

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  • 7/4/2019 23:34

पेट में कृमि (कीड़े) लक्षण : अंतड़ियों में जब विकार उत्पन्न हो जाता है, तो कृमि उत्पन्न हो जाते हैं। ये कीड़े मलज, श्लेष्मज, शोणितज तथा पुरीषज होते है़। ये चारों प्रकार के कीड़े बहुत सूक्ष्म होते हैं तथा श्लेष्मा वाले भोजन, ठंड़ा-गर्म दूध, गलत खाना आदि के कारण बन जाते हैं। इनके कारण बच्चों के शरीर का रंग हलका पीला पड़ जाता है तथा हलका बुखार भी रहने लगता है। पेट में दर्द रहता है और मुंह से लार टपकती है। बच्चा नींद में दांत किटकिटाता है।

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  • 6/4/2019 20:33

अश्मरी या पथरी ( Stone ), शरीर के अवयव :- मूत्रशाय, वृक्क (गुर्दे), पित्ताशय और गवीनी (मूत्रवाहिनी) में पाषाण (पत्थर) के सदृश उत्पन्न हुई रचना को 'अश्मरी' और अंग्रेजी में 'स्टोन' कहते हैं। आहार में नाइट्रोजन पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन, विटामिन्स की कमी, हरी सब्जियां, लवण व जल का अल्प मात्रा में सेवन तथा चाय, काॅफी, मदिरा और मिष्ठानों का अधिक मात्रा में सेवन आदि अश्मरी उत्पन्न होने के प्रमुख कारण हैं। तेज धूप में काम करने,जल कम पीने,गर्मी के कारण पसीने द्वारा अधिकांश जल शरीर में से निकल जाने से मूत्र में आपेक्षिक घनत्व बढ़कर अश्मरी उत्पन्न होती है। अर्थात मूत्र में आपेक्षित घनत्व बढ़ना अश्मरी का कारण है। मूत्र त्याग की इच्छा होने पर भी मू्त्र त्याग न करना भी इस रोग को उत्पन करने का एक प्रमुख कारण है तथा शरीरिक श्रम का अभाव भी अश्मरी उत्पन्न होने में सहायक है।

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  • 6/4/2019 10:18

कब्ज रोग आंतों की गड़बड़ी के कारण होता है।कब्ज हो जाने पर मल सरलता से नहीं निकलता। जमा हुआ मल आंतों में सड़ा करता है। इस रोग के प्रमुख कारण रात्रि जागरण, भय, दुख, शोक, ज्वर, पीलिया, भोजन कम करना,गरिष्ट पदार्थ खाना, चाय, काॅफी, तम्बाकू, शराब का सेवन का सेवन यकृत रोग, शारीरिक परिश्रम न करके निठल्ले बैठे रहना तथा वृध्दावस्था आदि हैं। कब्ज या कोष्ठबध्दता रोग हो जाने पर ज्वर, सिरदर्द, अरूचि, भूख न लगना, बेचैनी,जी मिचलाना, पेट दर्द, पेट में वायु भरने, शरीर आदि आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इस रोग के पुराने हो जाने पर बवासीर का रोग हो सकता है।

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  • 5/4/2019 09:36

माइग्रेन का घरेलू उपचार सरसों का तेल : यह आधे सिर दर्द में लाभदायक है। सिर के सिज आधे भाग में दर्द हो उस तरफ के नथुने में 8 बूंद सरसों का तेल डाल कर सूंघने से आधे सिर का दर्द शीघ्र बन्द हो जाता है । यह प्रयोग पामच दिन करें।

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