Ayurvedic Homeopathic Treatment for Constipation


2 min read
06 Apr
06Apr

                                                       चिकित्सा
घरेलू वैधक चिकित्सा

पंचसकार चूर्ण: 3 ग्राम चूर्ण की मात्रा में रात्रि को सोते समय गर्म पानी के साथ दें।

त्रिफला चूर्ण: 2 से 3 ग्राम चूर्ण की मात्रा में उपरोक्त विधिनुसार सेवन कराएं।

मजिष्ठादि चूर्ण: 5 ग्राम चूर्ण की मात्रा रात्रि को सोते समय दूध के साथ प्रयोग करें।

इच्चा भेदी रस: 125 मि.ग्रा. रस की मात्रा में रात्रि को मधु के साथ देना चाहिए।

# सौंफ, सनाय, मुलहठी और मिश्री समस्त औषधियों को समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर व छानकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें। इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा प्रात: समय सेवन करना हितकर है।

@: गुलाब की पत्तियां, सनाय और छोटी हरड़, तीनों औषधियों को क्रमश: 10: 8: 6 अनुपात में लेकर चूर्ण बनाकर 1 चम्मच की मात्रा में गुनगुने जल से सेवन करें। सौंफ, सनाय, और बादाम की गिरी प्रत्येक औषधि का समभाग चूर्ण बनाकर 1 चम्मच-भर प्रतिदिन रात्रि को गुनगुने जल से सेवन करें।

# : तेजपत्ते, इलायची और दालचीनी प्रत्येक 20-20 ग्राम, काली मिर्च, सोंठ और पीपल पत्येक 30-30 ग्राम तथा अनारदाना 100 ग्राम इन समस्त औषधियों के कूट-पीसकर कपड़े से छान कर चूर्ण बनाएं। तदुपरांत 250 ग्राम पुराने गुड़ में अच्छी प्रकार मिलाकर (गूंधकर) बेर के आकार की गोलियां बनाकर सुरक्षित रख लें तथा प्रतिदिन रात्रि को सोते समय 1 गोली सेवन करें।

# : 1-2 चम्मच एरण्ड का तेल (कैस्टर आयल) दूध 1 गिलास या गर्म (गुनगुने) जल में मिलाकर पीना अत्यंत हितकर है।

# : प्रतिदिन प्रात:-सायं दिन में 2 बार लहसुन की 1-1 कली सेवन करना भी उपयोगी है।

# : रात्रि को सोते समय फूलगोभी का आधा कप की मात्रा में रस पिएं अथवा सुबह-शाम 2-2 नग छुहारे दूध में उबालकर पहले छुहारे खाएं, फिर दूध पी जाएं या रात्रि को सोने से पहले 3-4 नग मुनक्के दूध में उबालें। पहले मुनक्के खाएं फिर दूध पीकर सो जाएं।

# : रात्रि को सोते समय 1 गिलास ताजा जल में बीबू का रस निचोड़कर पिएं अथवा प्रतिदिन रात्रि को सोते समय 1 गिलास गर्म जल चाय की भांति चुस्कियां लेकर पिएं अथवा प्रतिदिन प्रात: समय सोकर उठने के बाद शौच आदि क्रिया से पूर्ण (किंतु मंजन आदि कर मुख को साफ-स्वच्छ कर लें अथवा रात्रि को ही मंजन कर लें।) तांबे के एक बर्तन में रात्रि को खुले आकाश में सुरक्षापूर्ण ढंग से रखा गया जल पी जाएं। इसके अभाव में ताजा जल भी सेवन किया जा सकता है। इस क्रिया को ऊष:पान कहते हैं।

# : कब्ज में गन्ने का रस नीबू डालकर पीना भी उपयोगी है अथवा भोजनोपरांत भुने हुए चने छिलकों सहित खाएं।

                                                                                  होम्योपैथिक
बायोकैमिक चिकित्सा:
कालीम्यूर 200x " kali muriaticum "व नैट्रमम्यूर 200x " Natrum Muriaticum " : बायोकैमिल चिकित्सा पध्दति में कब्ज दुकरने हेतु यह दोनों औषधियां सर्वोत्तम मानी जाती हैं।

नैट्रमम्यूर 200x " Natrum Muriaticum " : कब्ज के साथ बवासीर रोग, पुराना अजीर्ण, आंतों में दुर्बलता तथा रोगी के मुंह में पानी आना। इन लक्षणों में भी यह औषधि परम हितकर है।

नैट्रमसल्फ 6x या 12x " Natrum Sulphuricum " : मल त्याग के समय दुर्गंधयुक्त वायु निकलना अथवा मल द्वार में खुजली होना, कठोर मल का गांठ के रूप में निकलना, मल में खून आना आदि लक्षणों में उपयोगी है।

साईलीशिया 12x या 30x " Silesia " : मल कड़ा होना, पाखाना बवाहर निकलने में कठिनाई, पाखाना कभी कम व कभी अधिक आना, गुदा में घाव तथा सुई चुभने की भांति दर्द होना आदि लक्षणों में परम लाभप्रद है।

कैल्केरिया फ्लोर 12x " Calcarea fluorica "  : यदि रोगी की आंतों में मल निकालने की शक्ति न रहे तो इसे सेवन कराएं।

कालीम्यूर 6x " kali muriaticum " : घी, तेल से निर्मित खाध पदार्थों को खाने के कब्ज होना, जीभ का रंग सफेद होना, इन लक्षणों में उपयोगी है।

फेरमफाॅस 6x "  Ferrum Phosphoricum " : कब्ज की दशा में शौच के समय जोर लगाने पर कांच निकल आती हो, ठण्ड का अनुभव हो, चेहरे पर पीलापन छा जाना, वायु (गैस) व हृदय की धड़कन बढ़ जाने के लक्षणों में हितकर है।

नैट्रमफाॅस 6x या 12x "  Natrum phosphoricum " : मल कभी कड़ा (कठोर) और कभी पतला, कभी उदर कृमि के साथ कब्ज होने के लक्षणों में 5 ग्रेन की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन कराएं।

विशेष निर्देश : कब्ज के रोगी को प्रतिदिन सोकर उठते 1-2 गिलास ठण्डा जल पीना चाहिए और ठण्डे जल से ही स्नान करना चाहिए। हल्का, सुपाच्य तथा नियत समय पर भोजन करना चाहिए। हरी सब्जियां, अंगूर, आम, पपीता, सेब संतरा, केला, बेल, कच्चा गूलर, अंजीर, खजूर, नाशपती, अमरूद, कागजी नीबू, दूध, मक्खन, शहद आदि का अधिकता से सेवन करना चाहिए। मूंग की दाल, दलिया, साबूदाना, जौ तथा चने की रोटी खूब चबा-चबाकर खानी चाहिए। चावल, मिर्च-मसालेयुक्त खाध-पदार्थ, घी-तेल से निर्मित पदार्थ, खटाई, अधिक मात्रा में मिठाई, रबड़ी व मावा (खोया) से निर्मित मिष्ठान आदि नहीं खाने चाहिए।

Natural A1
नेचुरा राइट हेल्थ केयर दुवारा दी जाने वाली उपचारों कि जानकारीया आपको अच्छी लगती है और आप नेचुरा राइट हेल्थ केयर को कुछ धन राशि सहयोग के रूप में देना चाहते हो तो वह सहयोग राशि दे सकते हो।
धन्यवाद।
मूल्य-5, 10, 50, 100, 200, 500, 1000

Pay Now